कच्‍चा दूध पीने से होगा नुकसान, उबाल कर ही पीना चाहिए दूध

आज पूरी दुनिया में नेशनल मिल्क डे सिलेब्रेट किया जा रहा है। इसका मुख्य मकसद दूध के फायदों के बारे में जानना और इसे अपनी डेली डाइट में शामिल करना है। दूध पीना हमारी सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। बच्चे हों, बड़े हों या फिर बुजुर्ग हर किसी को रोजाना एक गिलास दूध का सेवन करना ही चाहिए। दूध हड्ड़ियों के विकास के लिए जरूरी है और यह हमारे शरीर को कई पोषक तत्व भी प्रदान करता है। लेकिन कई लोग कच्चा दूध पीते हैं। कच्चा दूध वह है, जिसे हानिकारक बैक्टीरिया को मारने के लिए पाश्चुरीकृत नहीं किया जाता। यह किसी भी जानवर जैसे गाय, भैंस, भेड़, ऊंठ या बकरी से मिल सकता है। दरअसल, इस दूध में ब्रुसेला, कैम्पिलोबैक्टर, क्रिप्टो स्पोरीडियम, ई.कोलाई, हिस्टीरिया और साल्मोनेला जैसे खतरनाक रोगाणु होते हैं, जो आपके और आपके परिवार की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। तो आइए जानते हैं कच्चा दूध पीना कैसे रिस्की है।

कच्चे दूध में हानिकारक बैक्टीरिया और अन्य कीटाणु होते हैं। ये कीटाणु आपको बीमार कर सकते हैं या आपकी जान तक ले सकते हैं। हालांकि कई अलग-अलग खाद्व पदार्थों के सेवन से खाद्य जनित बीमारियां होना संभव है, लेकिन कच्चा दूध पीना सबसे ज्यादा जोखिम भरा है। कुछ लोग अपने स्वास्थ्य में सुधार के लिए कच्चे दूध का सेवन करते हैं, लेकिन इसमें मौजूद कीटाणुओं के कारण होने वाले संक्रमण के चलते हफ्तों तक अस्पताल में भर्ती होने की नौबत तक आ सकती है। कच्चे दूध से बीमार होने पर व्यक्ति कई दिनों तक दस्त, पेट में ऐंठन और उल्टी जैसा महसूस कर सकता है। जिन लोगों ने कच्चा दूध पीया है, उनमें गंभीर और जानलेवा बीमारियां देखी गईं हैं।

कच्चे दूध का सेवन अगर लंबे समय तक किया जाए, तो इससे व्यक्ति को रिएक्टिव आर्थराइटिस, गुइलेन बैरे सिंड्रोम और हैमोलिटिक यूरीमिक सिंड्रोम जैसी कई गंभीर बीमारियां हो सकती है। संदूषण से होने वाले संक्रमण से दस्त, उल्टी, निर्जलीकरण, मतली या बुखार का अनुभव हो सकता है। बता दें कि पाश्चुराइजेशन ज्यसदातर बैक्टीरिया को मारता है। इसके चलते किडनी फेलियर, स्ट्रोक यहां तक की मौत भी हो सकती है।

कच्चा दूध पीने से बीमार होने का जोखिम सबसे ज्यादा जोखिम शिशुओं और छोटे बच्चों , बड़े वयस्कों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों जिन्हें कैंसर , ऑर्गन ट्रांसप्लांट और एचआईवी है, उन्हें कच्चा दूध नहीं पीना चाहिए। लेकिन किसी भी उम्र के स्वस्थ लोग हानिकारक कीटाणुओं से दूषित कच्चा दूध पीने से बीमार हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, दूध पीना अच्छा है, लेकिन कच्चा दूध पीने के बहुत नुकसान हैं। पनीर, आइसक्रीम और दही सहित कच्चे दूध से बने उत्पाद हानिकारक बैक्टीरिया और अन्य कीटाणुओं से दूषित होते हैं। नियमित रूप से इनका सेवन करने पर गंभीर बीमारियों के साथ अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है। कई बार कच्चे दूध में कीटाणुओ की उपस्थिति मौत का कारण तक बन सकती है।

1993-2012 तक CDC को रिपोर्ट किए मामलों में 127 प्रकोपकच्चे दूध से जुड़े थे। ज्यादातर प्रकोप कैंपिलोबैक्टर, ई.कोलाई या साल्मोनेला के कारण हुए। कच्चे दूध के प्रकोप में बड़ी संख्सा में बच्चे शामिल थे। 2007-2012 तक सीडीसी को रिपोर्ट किए गए कच्चे दूध के प्रकोप में 5 से कम उम्र का कम से कम एक बच्चा शामिल था। इन प्रकोपों में 1 से 4 वर्ष की आयु के 38 प्रतिशत बच्चे साल्मोनेला और 28 प्रतिशत बच्चे ई.कोलाई के कारण बीमार पड़े। बता दें कि ईकोलाई जैसा बैक्टीरिया किडनी फेलियर और मौत के लिए जिम्मेदार हैं ।

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