‘श्रवण कुमार’ ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों की करेंगे देखभाल, गरीब मरीजों को मिलेगा रोजगार का अवसर

पटना
एम्स पटना द्वारा संचालित श्रवण कुमार योजना ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों व गरीब मरीजों को सहारा देने के साथ ग्रामीण युवाओं को रोजगार का भी अवसर उपलब्ध कराएगा। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अकेले रह रहे बुजुर्ग लोगों के बेहतर स्वास्थ्य जांच और देखभाल के लिए एम्स पटना के कम्युनिटी आउटरिच एंड टेलीमेडिसिन विभाग द्वारा श्रवण कुमार योजना शुरू की गई है। बुधवार को इसके दूसरे बैच में फिलहाल 36 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभाग के प्रभारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि श्रवण कुमार योजना एम्स पटना की एक महत्वपूर्ण योजना है। दो साल पहले इसके पहले बैच में 50 ग्रामीण युवाओं को इसके तहत प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें गांव के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को बुजुर्गों से जुड़ी बीमारियों व प्राथमिक इलाज के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।  120 दिनों के प्रशिक्षण के दौरान उन्हें तरह-तरह के खून जांच, बीपी, शुगर, थॉयरॉयड, बुखार, डायरिया, इंजेक्शन देने, स्लाइन चढ़ाने व अन्य प्राथमिक उपचारों की ट्रेनिंग दी जाती है। बुजर्गों में हर्ट अटैक, ब्रेन हैमरेज, डायरिया, की पहचान व प्राथमिक इलाज के अलावा किसी ज्ञी आपात स्थिति में दी जाने वाली दवाइयों व ततकाल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था संबंधी प्रशिक्षण दिया जाता है।

इसके लिए एम्स के अलग-अलग विभागों में 15 दिन से लेकर एक महीने की ट्रेनिंग दी जाती है। यहां से तैयार युवा अपने तथा आसपास के गांवों के बुजुर्गों और बेसहारा लोगों की नियमित चिकित्सा जांच करते हैं। उनके स्वास्थ्य की रिपोर्ट एम्स के चिकित्सकों के साथ-साथ उनके पुत्र अथवा रिश्तेदारों को भी मोबाइल के माध्यम से भेजते हैं। गंभीर स्थिति में उन्हें बेहतर इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराने में भी मदद करते हैं। स्वास्थ्य जांच के कारण उन्हें गांवों में ही कुछ पैसे भी मिल जाते हैं, जिनसे उनका खर्च भी निकल जाता है। डॉ. अनिल ने बताया कि ऐसे माता-पिता जिनके पुत्र गांवों से बाहर दूसरे शहरों अथवा दूर-दराज के राज्यों में रहते हैं, उनके लिए यह योजना तैयार की गई थी।

अब लगातार दिया जाएगा युवाओं का प्रशिक्षण
डॉ. अनिल ने बताया कि नए साल में मार्च-अप्रैल तक श्रवण कुमार का नया बैच तैयार होगा। इसके बाद नए बैच के लिए नामांकन होगा। इसमें उन्हीं युवाओं को जगह मिलती है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं हो। नामांकन से पहले सभी युवाओं का एम्स द्वारा पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जाता है।

कई श्रवण कुमार अस्पतालों में कर रहे हैं नौकरी
एम्स में पहले बैच में ग्रामीण क्षेत्र में सेवा के लिए तैयार किए गए श्रवण कुमारों में से कई सरकारी व निजी अस्पतालों में अटेंडेंट के रूप में कार्य करने लगे हैं। डॉ. अनिल ने बताया कि मेडिकल कार्यों में दक्ष हो जाने के कारण सरकारी और निजी अस्पतालों में भी उनकी काफी मांग हो जाती है। पहले बैच में तैयार 50 में से 35 लोग गांव छोड़कर सरकारी और निजी अस्पतालों में नौकरी करने लगे हैं। नए बैच में तैयार होने वाले श्रवण कुमारों से गांवों में स्वास्थ्य कार्य के लिए शपथ भी दिलाई जाएगी।

व्यवसायी और एनआरआई वर्ग में भी श्रवण कुमार की मांग
एम्स द्वारा तैयार किए गए श्रवण कुमारों की मांग व्यवसायी वर्ग से लेकर अधिकारियों व एनआरआई लोगों के बीच भी काफी ज्यादा है। बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए ये श्रवण कुमारों की तलाशी में एम्स पटना पहुंचते हैं। उनको एम्स द्वारा प्रशिक्षित श्रवण कुमारों की सूची मोबाइल नंबर के साथ उपलब्ध करा दी जाती है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *