पंजाब चुनाव: आत्मनगर में रोचक हुआ मुकाबला, कोर्ट के बाहर भी बैंस के खिलाफ लड़ रहे रेप केस के वकील

 नई दिल्ली।

पंजाब के एक विधायक सिमरजीत सिंह बैंस के खिलाफ बलात्कार से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को काफी तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, "क्या आपने उनकी गतिविधियों को देखा है? क्या यह व्यवहार करने का तरीका है?'' दो बार के विधायक और लोक इंसाफ पार्टी के संस्थापक-सह-अध्यक्ष न केवल लुधियाना में आत्मनगर सीट से फिर से चुनाव लड़ रहे हैं, बल्कि यह भी आश्वस्त हैं कि उनके सभी विरोधियों की जमानत जब्त हो जाएगी। उनमें महिला के वकील भी शामिल हैं, जो बैंस के खिलाफ कोर्ट में रेप केस लड़ रहे हैं। महिला की प्राथमिकी के अनुसार, 52 वर्षीय बैंस ने 2020 में उसके साथ कई बार बलात्कार किया। महिला संपत्ति विवाद मामले में मदद की गुहार लेकर विधायक के पास पहुंची थी। आपको बता दें कि महिला के वकील हरीश राय ढांडा आत्म नगर से अकाली दल के उम्मीदवार हैं।

पंजाब सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश
शुक्रवार को बैंस के खिलाफ तीखी टिप्पणियों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को एक स्टेटस रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया। साथ ही महिला के खिलाफ दर्ज सभी क्रॉस-एफआईआर के साथ-साथ उसकी गिरफ्तारी पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी। विधायक के वकील को फटकार लगाते हुए अदालत ने कहा, "वह (बैंस) दो बार विधायक रहे हैं। उस महिला के खिलाफ कितने मामले दर्ज किए गए हैं। अब वह अग्रिम जमानत चाहते हैं और वह चाहते हैं कि महिला जेल जाए।"
 
बैंस के भाई भी हैं विधायक
बैंस के बड़े भाई बलविंदर सिंह (63) भी विधायक हैं और लुधियाना दक्षिण से फिर से चुनाव जीतना चाहते हैं। बैंस पंजाब में अपनी तेजतर्रार राजनीति के लिए उतने ही जाने जाते हैं, जितना कि बादल के साथ उनकी कड़वी प्रतिद्वंद्विता मशहूर है। उनके खिलाफ मामलों की लंबी सूची है। नदी के पानी पर चर्चा के दौरान दोनों भाइयों को पंजाब विधानसभा से बाहर कर दिया गया था। पंजाब विधानसभा के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ था।

पुलिस चार्जशीट में बैंस के भाइयों के भी नाम
बैंस के खिलाफ बलात्कार के मामले में पुलिस चार्जशीट में उनके दो अन्य भाइयों (व्यवसायी करमजीत सिंह और परमजीत सिंह) का भी नाम है।चार्जशीट में कहा गया है, “आरोपी और पीड़िता के मोबाइल टावर लोकेशन पीड़ित द्वारा प्रदान किए गए क्षेत्रों और समय से मेल खाते हैं।" आपको बता दें कि उनके खिलाफ 10 जुलाई, 2021 को बलात्कार, हमला, आपराधिक बल, यौन उत्पीड़न और साजिश के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

छह महीने में भी नहीं हो सकी कोई गिरफ्तारी
छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अभी तक बैंस या प्राथमिकी में नामजद अन्य आरोपियों में से किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया है। पिछले साल नवंबर में एक स्थानीय अदालत में चार्जशीट पेश करते हुए लुधियाना पुलिस ने कहा कि "विधायक सिमरजीत बैंस को गिरफ्तार करने से कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है, क्योंकि उनके समर्थक उत्तेजित हो सकते हैं।" पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते वह भाग नहीं सकते हैं। इसने अदालत से उसे समन जारी करने का आग्रह किया। बाद में उनके खिलाफ कई बार गैर-जमानती वारंट जारी किए गए।

किसान आंदोलन का समर्थन करने के कारण हो रहे प्रताड़ित: बैंस
बैंस का कहना है, “अन्य दल हमसे डरते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि बैंस भाइयों को आम लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने से कोई नहीं रोक सकता। हम भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। अगर कोई रिश्वत लेता है तो हम उसे हर हाल में बेनकाब करेंगे। हम पेशेवर नहीं बल्कि भावुक राजनेता हैं, जो लोगों की सेवा करना चाहते हैं।” बैंस कहते हैं कि उन्होंने केबल और भूमि माफिया के साथ-साथ कृषि कानूनों जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई, इसलिए हमारे खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

बैंस का सियासी सफर
बैंस ने 1991 में एक स्वतंत्र पार्षद के रूप में जीत हासिल की। ​​बैंस 2002 में भी एक स्वतंत्र पार्षद के रूप में चुने गए और 2004 में शिअद (बादल) में शामिल हो गए। युवा अकाली दल के नेता के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वह पहली बार प्रतिद्वंद्वियों के साथ अपने लगातार प्रदर्शन के लिए जाना जाने लगा। 2012 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले दो बैंस भाइयों ने शिरोमणि अकाली दल छोड़ दिया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि पार्टी ने उनके बीच सिर्फ एक टिकट देने पर सहमति व्यक्त की। दोनों ने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद अपने निर्वाचन क्षेत्रों आत्म नगर और लुधियाना दक्षिण में अपना दबदबा कायम किया।
 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *