बीजेपी के ‘एमवाई’ के आगे नहीं टिक पाया विपक्ष का ‘MY’ फार्मूला

 लखनऊ  

चुनावी रैलियों में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि यूपी प्लस योगी, बहुत है उपयोगी। गुरुवार को आए चुनावी नतीजों ने भी इस बात पर मुहर लगा दी कि योगी वाकई यूपी के लिए उपयोगी हैं। प्रदेश में बाबा के बुलडोजर की दहाड़ के आगे सभी विरोधी पस्त हो गए। मोदी के नाम और योगी के काम यानी ‘एमवाई’ फैक्टर पर जनता के विश्वास का नतीजा रहा कि यूपी में 37 साल बाद भाजपा सरकार ने फिर वापसी कर ली है। भाजपा की सीटें भले पहले से कम रहीं लेकिन पार्टी के वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ है।

इस विधानसभा चुनाव में भाजपा की मुख्य विरोधी रही समाजवादी पार्टी का प्रमुख समीकरण एमवाई (यादव, मुस्लिम) फैक्टर ही था। बसपा भी ब्राह्मणों के साथ 2007 वाली जुगलबंदी दोहराने के प्रयास में लगी थी। लड़की हूं, लड़ सकती हूं, अभियान के साथ प्रियंका यूपी में खोई जमीन तलाश रही थीं। मगर भाजपा का ‘एमवाई’ (मोदी-योगी) फैक्टर सब पर भारी पड़ा। विरोधियों के तमाम समीकरण इस जोड़ी के आगे बौने साबित हुए। भाजपा की इस जीत में योगी की बेदाग और बुलडोजर बाबा वाली छवि को लोगों ने पसंद किया। उनके नेतृत्व पर प्रदेश की जनता ने मुहर लगा दी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुए चुनावी रण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहतर कानून-व्यवस्था पर ही सबसे ज्यादा जोर दिया। पीएम मोदी ने जहां प्रदेश में 28 चुनावी रैलियां कीं, वहीं रोड शो और संवाद के जरिए चुनावी फिजां बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बसपा के वोट बैंक में बिखराव का हुआ लाभ
भाजपा का बढ़ा हुआ वोट प्रतिशत इस बात की गवाही दे रहा है कि उसे सभी वर्गों का वोट मिला है। खासतौर से बसपा के कमजोर होने का लाभ भाजपा को मिला। नीले खेमे के वोट बैंक में पार्टी इस बार सेंधमारी करने में सफल रही। मुस्लिम महिलाओं के वोट भी भाजपा को मिले। यही कारण है कि मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर भाजपाई चेहरों को जीत मिली। भाजपा के वोट बैंक में इजाफा करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने सुरक्षा और लाभ की योजनाओं के नाम पर वोट दिया।

दिखा राशन की डबल डोज का असर
भारतीय जनता पार्टी की जीत में दूसरा अहम योगदान करीब 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की डबल डोज का रहा। राशन के साथ योगी सरकार ने नमक और तेल भी मुफ्त दिया। नतीजों से साबित हुआ कि गरीबों ने नमक का हक भी अदा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभाओं में इसका आह्वान भी किया था। किसानों और ब्राह्मणों की भाजपा से नाराजगी के विपक्ष के दावों में भी कोई खास दम नहीं दिखा। ब्राह्मण वोटरों की पहली पसंद भाजपा ही रही।

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