लखनऊ से आए चूहों पर प्रयोग, वेटरनरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक कर रहे स्टडी

जबलपुर
मध्य प्रदेश के पानी में बढ़ रही लेड (शीशा) की मात्रा चौपाया गौवंश यानि गाय-भैंस सहित अन्य पशुओं के स्वास्थ्य पर कितना हानिकारक प्रभाव डालती है,इसके लिए वेटरनरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक स्टडी में जुटे हैं। दरअसल, यह स्टडी प्रदेश की एक मात्र  नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी के अंतर्गत संचालित एनिमल हाउस में लखनऊ से मंगाए गए चूहों पर की जा रही है। वैज्ञानिक लेड के दुष्प्रभाव पर रिसर्च कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।

50 चूहों पर कर रहे हैं स्टडी
एनिमल हाउस की प्रभारी डॉ. अमिता दुबे बताती हैं कि एनिमल हाउस में फिलहाल 50 चूहों पर लेड का प्रभाव देखने के लिए स्टडी की जा रही है।  इसके लिए हमने पहले एक्सपेरीमेंटल एनिमल यानि चूहों को लेड कंटेट दिए हैं। इसके बाद इनमें देखे जा रहे हानिकारक प्रभाव को कम करने के लिए हर्बल दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है। स्टडी के रिजल्ट आने के बाद पानी में बढ़ती लेड की मात्रा से होने वाले दुष्प्रभावों से किन दवाओं से पशुओं को सुरक्षित कर सकते हैं  न सिर्फ ये जानकारी मिलेगी बल्कि यह कितना घातक हो सकता है यह भी पता लगा सकेंगे।

2 करोड़ 73 लाख का है प्रोजेक्ट
जानकारी के मुताबिक  विवि को यह प्रोजेक्ट मंडी बोर्ड  द्वारा दिया गया है। इसके तहत 2 करोड़ 73 लाख रुपए का बजट दिया गया, जिसमें एक करोड़ से अधिक की लागत से एनिमल हाउस को तैयार किया गया है। इस हाउस में बनाए गए कमरों को इस तरह से तैयार किया गया कि इनमें जानवरों को रहने के लिए अनुकूल वातावरण को मेन्टेन किया जाता है। साथ ही इन पर स्टडी की जाती है।

वर्सन
एनिमल हाउस में वैज्ञानिकों व उनके मार्गदर्शन में वेटरनरी छात्र-छात्राएं चूहों पर स्टडी कर रहे हैं। इससे भविष्य में पशुओं को होने वाली बीमारी व उनके उपचार के लिए दवाओं के प्रयोग आदि संबंध में न सिर्फ जानकारी मिलेगी बल्कि पशुओं को बीमारियों से ग्रसित होने से पहले ही  इससे बचाव के उपाय कर सकेंगे। इसका सीधा फायदा किसानों और पशुपालकों को होगा।
डॉ. एसपी तिवारी, कुलपति वीयू

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