राजस्थान के भरतपुर जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली खबर, अंतिम संस्कार के लिए जमीन तक नहीं

भरतपुर
भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र के गांव सेवा कुरवारिया निवासी एक दलित की शुक्रवार को बीमारी के चलते मौत हो गई। लेकिन दलित की मौत के बाद इंसानियत की भी हत्या हो गई। असल में गांव की अस्थाई श्मशान भूमि पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। गांव में श्मशानघाट के लिए कोई सरकारी भूमि भी नहीं है। ऐसे में दलित का करीब 12 घंटे तक अंतिम संस्कार नहीं हो सका। दलित परिवार 12 घंटे तक शव को घर में रखकर मजबूर होकर बैठा रहा। आखिर में सूचना पाकर शनिवार को बयाना तहसीलदार , गिरदावर और पटवारी गांव पहुंचे और तब जाकर दलित का अंतिम संस्कार कराया जा सका।

शव घर में रख रातभर बेबस होकर बैठे रहे आदिवासी
गांव के बुजुर्ग विजय सिंह बंजारा की शुक्रवार को भरतपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन शव को लेकर गांव पहुंचे। जब दलित मृतक के परिजनों ने गांव में नदी के बहाव क्षेत्र में परंपरागत स्थान पर अंतिम संस्कार करना चाहा तो दबंगों ने अंतिम संस्कार करने से रोक दिया। क्योंकि उस अस्थाई श्मशान स्थल पर गांव के ही दबंगों ने अतिक्रमण कर रखा है।  दलित परिवार के पास खुद की जमीन भी नहीं थी। ऐसे में समस्या खड़ी हो गई कि आखिर अंतिम संस्कार कहां किया जाए। जब कोई रास्ता नहीं मिला तो दलित परिवार शव को वापस घर के दालान में रखकर रातभर मजबूर होकर बैठे रहे।  

पुलिस ने निकाला ये रास्ता
इस पूरी घटना की जानकारी जब स्थानीय प्रशासन को मिली तो प्रभारी उपखंड अधिकारी अमित शर्मा अन्य अधिकारियों के साथ गांव पहुंचे। अधिकारियों ने गांव में ही एक सरकारी जमीन पर करीब 12 घंटे बाद दलित मृतक का अंतिम संस्कार कराया। प्रभारी उपखंड अधिकारी अमित शर्मा ने बताया कि जल्द ही गांव में सरकारी जमीन को शमशान के लिए चिह्नित कर कागजी कार्रवाई करेंगे। ताकि ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए परेशान न होना पड़े।

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