निगम में जल्द हो सकती है एक बड़ी सर्जरी, कमिश्नर ने भेजा प्रोपोजल

भोपाल
नगर निगम भोपाल में वर्षों से डेप्यूटेशन पर जमे अफसरों पर जल्द फिर एक बार गाज गिरने वाली है। हालांकि इसके पहले भी पिछले साल प्रतिनियुक्ति पर 66 से अधिक अफसर और कर्मचारियों को हटाया गया था, लेकिन उसके बाद दोबार कार्रवाई नहीं हुई। किंतु इस बार फिर मलाईदार विभागों में पदस्थ बाहरी अफसर बीएमसी कमिश्नर केवीएस चौधरी के निशाने पर हैं।

इनको हटाने के लिए निगमायुक्त ने पीएस नितेश व्यास को एक पत्र भेजा है। कुल मिलाकर निगम को हरी झंडी मिलने का इंतजार है। पीएस के पत्र पर संज्ञान लेते ही निगम में एक बड़ी सर्जरी होना तय है। गौरतलब है कि करीब 50 अधिकारी हैं ऐसे हैं, जिनके वेतन, गाड़ी और अन्य भत्तों पर निगम सालाना करीब 7 करोड़ रुपए व्यय कर रहा है। 15 लाख रुपए के हिसाब से सिर्फ गाड़ियों से आने-जाने वाले अफसरों को सालाना 1 करोड़ 80 लाख रुपए से अधिक खर्च हो रहे हैं। ज्यादातर यह अधिकारी निगम के मलाईदार विभागों में डटे हुए हैं।

निगम के कई मलाईदार विभागों में लंबे समय से जमे अफसर निगमायुक्त के निशाने पर हैं। इनमें उपायुक्त हर्षित तिवारी 23 साल से जमे, विनोद कुमार शुक्ला 6 साल से जमे और मनोज श्रीवास्तव 5 साल से जमे। सहायक आयुक्त विजय तिवारी, इशांक धाकड़, संध्या चतुर्वेदी, मनोज कुमार मौर्या। अधीक्षण यंत्री पीके जैन। स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संध्या नायर, नगर यंत्री द्रव अविनाश श्रीवास्तव, प्र. कार्यपालन यंत्री शैलेंद्र श्रीवास्तव, वेटनरी आॅफिसर एसके श्रीवास्तव, सहायक यंत्री केशव पाठक, स्वास्थ्य अधिकारी एसपी श्रीवास्तव।

नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर अफसर और कर्मचारियों की लंबी फौज है। निगम इनको हटाकर करीब 2 करोड़ रुपए सालान बचाने का अनुमान लगाया है। जानकारों के अनुसार पिछले साल बनी दूसरी लिस्ट में करीब 100 अधिक अफसर और कर्मचारियों के नाम पर कार्रवाई हो सकती है।

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