जैसलमेर में 242 करोड़ की कृत्रिम झील तैयार, 50 लाख लोगों और पशुधन को मिलेगा पानी

जयपुर

 भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान केरेगिस्तानी जिले जैसलमेर में कृत्रिम झील (आर्टिफिशियलझील) बनकर तैयार हुई है। इस झील को गड़ीसर झील भी कहा जाता है।

सीमावर्ती क्षेत्र के दो जिलों के करीब 50 लाख लोगोंएवं मवेशियां की प्यास बुझाने के लिए 242 करोड़ रूपए की लागत से बनकर तैयार हुई इस कृत्रिम झील का उद्धाटन जुलाई में होने की उम्मीद है। झील जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई है।

रेगिस्तान की मिट्टी झील के पानी को सोंख नहीं ले,इसके लिए इसमें नीचे (बेस एरिया में) तीन सौ माइक्रोन कीविशेष प्लास्टिक शीट बिछाई गई है। इस प्लास्टिक पर ढ़ाई फीट मिट्टी की परत बिछाई गई है। सरकारी अधिकारियों का दावा है कि यह एक सौ साल तक खराब नहीं होगी। करीब 28 किलोमीटर लंबी और 33 फीट गहरी झील में 141 करोड़ लीटर पानी का भराव हो सकेगा।

कृत्रिम झील इंदिरा गांधी नहर के पानी से भरी जाएगी। दरअसल, प्रतिवर्ष मानसून से पहले इंदिरा गांधी नहर की मरम्मत के समय आम लोगों एवं मवेशियों को पानी को लेकर होने वाली परेशानी से बचाने के लिए यह नहर तैयार की गई है। इंदिरा गांधी नहर का पानी इस नहर में भरा जाएगा और फिर फिल्टर प्लांट से जैसलमेर एवं बाड़मेर जिलोंके घरों में पहुंचाया जाएगा।

इस कारण हुआ नहर का निर्माण
जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र में प्रतिवर्ष मानसून से पहले एक माह के लिए इंदिरा गांधी नहर की मरम्मत की जाती है,जिसे नहरबंदी कहा जाता है। इस दौरान नहर में पंजाब की तरफ से बहकर आने वाले पानी को रोक दिया जाता है।

नहरबंदी के दौरान जैसलमेर एवं बाड़मेर जिलों के लोगों को प्रतिवर्ष परेशानी होती है। इस परेशानी को दूर करने के लिए इस झील का निर्माण हुआ है। नहरबंदी से पहले इंदिरा गांधी नहर से पानी कृत्रिम नहर में भरा जाएगा।जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता रामपाल मूंधियाड़ा ने बताया कि कृत्रिम नहर का निर्माण साल,2024 से शुरू हुआथा,अब बनकर तैयार हुई है।

पंजाब से श्रीगंगानगर होते हुए आने वाली इंदिरा गांधी गांधी नहर से इस झील को जोड़ा गया है।उन्होंने बताया कि मानसून के दिनों में जब पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश होती है तो इंदिरा गांधी नहर में क्षमता सेअधिक पानी आ जाता है। बारिश के दिनों में खेतों में भी पानी भर जाता है।

ऐसे में किसानों को भी सिंचाई के लिए नहरी पानी की जरूरत नहीं रहती है। इस दौरान नहर के अतिरिक्त बहने वाले पानी को मोड़कर इसमें भरा जाएगा। इसके लिए एकस्क्रेप चैनल बनाया गया है।इसके दो गेट हैं,जिसमें एक गेट इंदिरा गांधी नहर से पानी आने के लिए और दूसरा झील में पानी डालने के लिए खोला जाएगा।

इसलिए कहा जाता है कृत्रिम नहर
इस झील को कृत्रिम झील इसलिए कहा जाता है,क्योंकि यह प्रकृति द्वारा नहीं बनाई गई,बल्कि यह मानव निर्मित है। उल्लेखनीय है कि 127 किलोमीटर लंबी इंदिरा गांधी नहर पंजाब के हरिके बैराज से शुरू होकर हरियाणा के उत्तर-पश्चिमी भाग से थोड़ी दूरी तक बहती है और पश्चिमी राजस्थान में सीमावर्ती गड़रा रोड़ के पास स्थित रेगिस्तान में समाप्त हो जाती है।

 

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