हरियाणा में धान पर फिजी वायरस का कहर, 1500 एकड़ फसल प्रभावित, किसान चिंतित
कैथल
जिले में धान मे आए फिजी वायरस ( बोना पन) के कहर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि विभाग ने भी धान की फसल में आए वायरस की पुष्टि की है। अब तक जिले में 1500 से ज्यादा एकड़ में खड़ा धान इसकी चपेट में आ चुका है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने की चिंता सता रही है।
धान की फसल में आए वायरस से न केवल कैथल जिला बल्कि कुरुक्षेत्र, करनाल, अंबाला में भी धान की फसल प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि बीमारी के चलते पौधा छोटा रह गया है, जिसका असर उत्पादन पर पड़ेगा, इसे लेकर विभाग को गंभीरता दिखाते हुए सैंपलिंग की जानी चाहिए, ताकि किसानों को नुकसान न हो।
वायरस को रोकने के लिए बनाई दो टीमें
कृषि विश्वविद्यालय हिसार के धान अनुसंधान केंद्र कौल की तरफ से दो टीमों का गठन धान में फैले फिजी वायरस को रोकने के लिए गया है। ये टीमें अब तक कैथल, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र के खेतों का दौरा कर धान की फसल की जांच कर चुकी है।
अधिकारियों का मानना है कि धान की फसल में फिजी वायरस की एंट्री हो चुकी है, इसे रोकने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। वायरस से कैसे छुटकारा पाया जाए, इस बारे में किसानों को बताया जा रहा है। बता दें कि कैथल के गांव बाबा लदाना, हाबड़ी, पाड्ला, पट्टी अफगान, पाई, डुलियानी सहित कई गांव में धान बीमारी की चपेट में आ चुका है।
धान की किस्म 7501-7301 सहित पीआर 114
जिले में धान की किस्म 7501-7301 सहित पीआर 114, 126 व 131 में फिजी वायरस सबसे ज्यादा फैल रहा है। अब तक कई गांव में 1500 से ज्यादा एकड़ में धान चपेट में आ चुका है।
धान अनुसंधान केंद्र की टीमों ने नर्सरी स्तर पर चीका ब्लाक के गांव मस्तगढ़, पूंडरी ब्लाक के गांव बरोट, सीवन ब्लाक के गांव रसुलपुर, पिहोवा ब्लाक के गांव थाना, कुरुक्षेत्र जिले के गांव पिंडारसी से करीब 30 सैंपल वायरस को लेकर धान से लिए जा चुके हैं। अब भी टीमें रोजाना किसी न किसी गांव का दौरा कर किसानों को फिजी वायरस से बचाव को लेकर जागरूक कर रही है।
किसानों को फिजी वायरस से बचाव बारे किया जा रहा जागरूक: सैनी
धान अनुसंधान केंद्र कौल के कृषि विज्ञानी सुमित सैनी ने बताया कि धान की फसल में फिजी वायरस की एंट्री से इंकार नहीं किया जा सकता। धान की पनीरी में तो यह वायरस नहीं था, लेकिन अब आ चुका है।
इसे रोकने के लिए दो टीमों का गठन किया है, जो अलग-अलग क्षेत्र में जाकर किसानों को धान की फसल को वायरस से बचाव के लिए जागरूक कर रही हैं। किसानों से भी अपील है कि इस बारे में जानकारी दें, ताकि समय रहते वायरस को पता चल सके।



