जनता को त्वरित राहत और अधीनस्थों को बेहतर मार्गदर्शन देना प्रभावी पुलिस नेतृत्व की पहचान – डीजीपी कैलाश मकवाणा
भोपाल
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से हाल ही में प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके 10 सहायक पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) अधिकारियों ने आज पुलिस मुख्यालय भोपाल में सौजन्य भेंट की। इस दौरान डीजीपी मकवाणा ने अधिकारियों से पुलिस नेतृत्व, पर्यवेक्षण एवं मैदानी कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया तथा उन्हें पुलिस सेवा में प्रभावी नेतृत्व के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। डीजीपी मकवाणा ने अधिकारियों से कहा कि एसडीओपी पहला पर्यवेक्षण अधिकारी होता है, इसलिए पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। जनता की शिकायत का समाधान पुलिसिंग की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक है। पीड़ित की शिकायत को पहले चरण में ही समझकर उसके निराकरण का प्रयास किया जाए, ताकि उन्हें त्वरित राहत मिल सके।
डीजीपी मकवाणा ने कहा कि पुलिस नेतृत्व में ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ प्रभावी पर्यवेक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिकारी अपने अधीनस्थों के कार्यों की नियमित समीक्षा करें, उनकी समस्याओं को समझें और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एक अच्छे अधिकारी की जिम्मेदारी केवल कार्यों की निगरानी तक सीमित नहीं होती, बल्कि अधीनस्थों का मार्गदर्शन करना और उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना भी नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने थानों के निरीक्षण के संबंध में कहा कि निरीक्षण के दौरान पुलिस कार्यप्रणाली की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से निरुद्ध न रखा जाए तथा थानों में लगे सीसीटीवी कैमरे चालू एवं कार्यशील स्थिति में रहें, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को थानों का नियमित एवं औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए, ताकि मैदानी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त हो सके।
डीजीपी मकवाणा ने कहा कि अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले नियमित निरीक्षणों का हिस्सा बनें और निरीक्षण के दौरान पुलिसिंग की बारीकियों को समझें। मैदानी अनुभव और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन से पुलिसिंग की व्यावहारिक समझ विकसित होती है, जिसका लाभ आगे की सेवा में मिलता है। उन्होंने तकनीक आधारित पुलिसिंग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अपराधों एवं प्रकरणों के निराकरण में उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) के माध्यम से उपलब्ध फिंगरप्रिंट संबंधी तकनीकी सहायता का उपयोग कर अपराधों एवं प्रकरणों के निराकरण को और प्रभावी बनाने की बात कही। उन्होंने थाने की कार्यप्रणाली के संदर्भ में थाना परेड को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नियमित परेड के माध्यम से बल की उपस्थिति, अनुशासन, वर्दी, टर्नआउट एवं आवश्यक निर्देशों की जानकारी सुनिश्चित की जा सकती है।
डीजीपी मकवाणा ने कहा कि पुलिस सेवा में प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार की समस्याएं सामने आती हैं। अधिकारी का दायित्व है कि वह समस्याओं को टालने के बजाय उनकी जड़ तक पहुंचे और उपलब्ध संसाधनों एवं नियमों के अनुरूप समाधान का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि अधीनस्थों की समस्याओं का समाधान करने वाला नेतृत्व ही संगठन में विश्वास और बेहतर कार्यसंस्कृति विकसित करता है।
इस अवसर पर अधिकारियों ने पुलिसिंग एवं नेतृत्व से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचार और जिज्ञासाएं साझा कीं। डीजीपी मकवाणा ने अपने अनुभवों के आधार पर अधिकारियों के प्रश्नों का मार्गदर्शन किया तथा उन्हें सेवा के प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर एवं एसओ टू डीजीपी मलय जैन भी उपस्थित थे।



