ऑपरेशन सिंदूर में सुसाइड ड्रोन ने मचाया तहलका, इस महीने रिटायर होंगे एयर चीफ एपी सिंह
नई दिल्ली
दुनिया भर में चल रहे संघर्षों को देखते हुए यह साफ हो गया है कि मजबूत सैन्य बल हर देश की जरूरत है. हाल के वर्षों में वायु शक्ति किसी भी देश की ताकत की सबसे तेज धार बन चुकी है. भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंसमें यही बात दोहराई।
उन्होंने कहा कि वायुसेना लगातार अपनी क्षमताओं को बेहतर बना रही है. हर युद्ध घटक का अपना महत्व है लेकिन संयुक्त बल की जरूरत सबसे ज्यादा है. ऑपरेशन सिंदूर में आईएएफ ने यही साबित किया. वायुसेना न सिर्फ ऑपरेशनल पंच देती है बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी आगे रहती है. कई देशों में मदद पहुंचाकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना को जीवंत किया है।
एयर चीफ ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया कि पाकिस्तानी विमानों को निशाना बनाया गया जो खतरा बन रहे थे. भारतीय लॉइटरिंग म्यूनिशन्स ने दुश्मन पक्ष में भारी अफरातफरी मचा दी. उन्होंने साफ कहा कि वायुसेना को अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं है. मौजूदा ढांचे में ही ड्रोन और अन्य सिस्टम को एकीकृत किया जा रहा है।
संख्या की कमी को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि मिग-21 को पिछले साल चरणबद्ध तरीके से हटाया गया जबकि इसे दो-तीन साल पहले करना चाहते थे. देरी नुकसान पहुंचाती है लेकिन मौजूदा प्रगति से उम्मीद है कि अंतर भर जाएगा. कम विमान होने के बावजूद ऑपरेशनल क्षमता को लेकर वायुसेना सहज है क्योंकि खरीद प्रक्रिया चल रही है।
आत्मनिर्भरता अब मजबूरी बन चुकी है…
आत्मनिर्भरता अब मजबूरी बन चुकी है. एयर चीफ ने एचएएल और एडीए को पूर्ण समर्थन देने की बात कही. स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, एएमसीए के साथ मिसाइल और रडार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया. एमआरएफए सौदा इस वित्तीय वर्ष में हस्ताक्षरित होने की उम्मीद है बशर्ते दोनों पक्ष काम करें. स्क्वाड्रन ताकत बढ़ाने के लिए एचएएल हर साल 24 से अधिक विमान बनाने की बात कर रहा है।
एमआरएफए पूरा होने पर आवश्यक लड़ाकू विमान मिल सकेंगे. चीन के बढ़ते स्टील्थ विमान और पाकिस्तान द्वारा उन्हें हासिल करने की कोशिश चिंता का विषय है लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में वे कुछ खास नहीं कर पाए. आधुनिक हथियार प्रणालियों को अपने प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जा रहा है।
वायुसेना का विजन साफ है. एआई आधारित बल तैयार किया जाएगा जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायता करेगी लेकिन फैसला इंसान के हाथ में रहेगा. अंतरिक्ष क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने और मुख्य ऑपरेशनों के समर्थन पर काम चल रहा है. स्पेस हथियारों पर भी शुरुआत हो चुकी है. थिएटर कमांड के बारे में एयर चीफ ने कहा कि वे इसके खिलाफ नहीं हैं. बहुपक्षीय अभ्यासों में भागीदारी जारी है जिसमें तरंग शक्ति सबसे बड़ा है. ये अभ्यास सहयोग और अनुभव साझा करने का माध्यम बनते हैं।
संगठन से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं और व्यक्तिगत संदेश
एयर चीफ ने फ्लाईदुबई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण था लेकिन भारतीय पायलट का साहस सराहनीय है और उन पर गर्व है. उन्होंने जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं है. पिछले दो साल में जो कुछ हुआ वह पूरी वायुसेना का काम है. जो नहीं हो पाया उसकी जिम्मेदारी वे खुद लेने को तैयार हैं और संतुष्ट हैं।
रिश्वत और हनीट्रैप के मामलों पर संवेदनशील बनाया जा रहा है. प्रियंका सक्सेना मामले में अदालत के फैसले का पालन होगा और प्रशिक्षण के बाद उन्हें स्क्वाड्रन लीडर के रूप में शामिल किया जाएगा. यह एयर चीफ की अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस है क्योंकि वे इस माह के अंत में सेवा निवृत्त हो रहे हैं।
उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारतीय वायुसेना हमेशा तैयार रहेगी. दिग्गज सैनिकों का भी आभार जताया. कुल मिलाकर यह वार्ता वायुसेना की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की दिशा को साफ करती है. संख्या की कमी के बावजूद तकनीक, आत्मनिर्भरता और संयुक्त अभियानों पर जोर देकर आईएएफ अपनी ताकत बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है।



