उत्तरकाशी की ‘सीता रसोई’ बनी रामलीला कलाकारों का सहारा, 2012 में हुई थी शुरुआत
उत्तरकाशी
मंच पर भगवान श्रीराम की लीला का सजीव मंचन और दर्शकों की तालियां रामलीला का आकर्षण हैं, लेकिन पर्दे के पीछे भी एक ऐसी व्यवस्था चलती है, जो कलाकारों व आयोजन से जुड़े लोगों की भूख का भी ख्याल रखती है।
उत्तरकाशी की श्री आदर्श रामलीला समिति की ‘सीता रसोई’ इसी सेवा भावना का उदाहरण है, जहां रामलीला में अभिनय करने वाले कलाकारों और आयोजन से जुड़े लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है। उत्तरकाशी की ऐतिहासिक रामलीला इस वर्ष 75वां अमृत महोत्सव मना रही है।
पांच से 20 अक्टूबर तक चलने वाले मंचन में बड़ी संख्या में कलाकार विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। रामलीला का मंचन देर रात तक चलता है। ऐसे में कलाकारों और आयोजन में जुटे सहयोगियों के लिए समय पर भोजन उपलब्ध कराना भी एक बड़ी जिम्मेदारी होती है।
सीता रसोई इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है। रसोई में भोजन तैयार करने और परोसने में समिति से जुड़े लोग भी सहयोग करते हैं। कई दानीदाता सीता रसोई के लिए खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध कराते हैं।
2012 में हुई थी शुरुआत, 2019 में दोबारा निर्माण
रामलीला समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2012-13 में सीता रसोई अस्थायी रूप से रामलीला भवन की छत पर शुरू की गई थी। बाद में भवन के पीछे रसोई घर की व्यवस्था की गई, लेकिन तत्कालीन पालिकाध्यक्ष ने अतिक्रमण बता कर उसे तुड़वा दिया था। इसके बाद वर्ष 2019 में पालिका व प्रशासन के सहयोग से सीता रसोई का दोबारा निर्माण किया गया। वर्तमान में सूरज भट्ट सीता रसोई में भोजन निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
होटल बंद होने पर कलाकारों को नहीं मिलता था भोजन
श्री आदर्श रामलीला समिति के अध्यक्ष जयेन्द्र सिंह पंवार बताते हैं कि पहले रामलीला का मंचन देर रात तक चलने के कारण होटल व रेस्टोरेंट बंद हो जाते थे। इस कारण कई बार कलाकारों को भोजन नहीं मिल पाता था। सीता रसोई की व्यवस्था शुरू होने के बाद कलाकारों को इस परेशानी से राहत मिली है। अब समिति की अपनी व्यवस्था होने से देर रात तक मंचन में जुटे कलाकारों को भोजन के लिए भटकना नहीं पड़ता।


