महाकाल मंदिर में भस्म आरती के साथ दिवाली का आगाज, बाबा को कराया अभ्यंग स्नान
उज्जैन
मध्य प्रदेश में दिवाली की शुरुआत श्री महाकालेश्वर मंदिर में हुई। यहां रविवार सुबह भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का अभ्यंग स्नान कराया गया।पुजारी परिवार की महिलाओं और बच्चों ने बाबा को उबटन लगाया, वहीं पुजारियों ने गर्म जल से स्नान कराया। इसके बाद भगवान को अन्नकूट का भोग अर्पित किया गया।
दीपावली के अवसर पर मंदिर की परंपरा के अनुसार आरती के दौरान फुलझड़ी जलाकर उत्सव की शुरुआत की गई। मंदिर में दिवाली पर होने वाली चारों आरतियों में फुलझड़ी जलाने की परंपरा है। इसमें प्रात:कालीन भस्म आरती, अभ्यंग स्नान के बाद होने वाली आरती, संध्या आरती और शयन आरती शामिल हैं। प्रत्येक आरती में एक-एक फुलझड़ी जलाई जाएगी।
महाकाल मंदिर में त्योहार सबसे पहले मनाने की परंपरा रही है। दीपावली पर भी धार्मिक विधि-विधान के साथ बाबा महाकाल के पूजन और अभ्यंग स्नान से पर्व का शुभारंभ हुआ।
लक्ष्मी-गणेश और मां सरस्वती का संयुक्त पूजन
पंडित अमर डब्बेवाला ने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर इस बार आयुष्मान योग रहेगा।
अमावस्या के प्रदोष काल में माता लक्ष्मी के प्राकट्य की मान्यता है। इस दिन माता लक्ष्मी के पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन के साथ गणपति और मां सरस्वती की संयुक्त पूजा का विधान भी शास्त्रों में बताया गया है। तीनों देवताओं का पूजन करने से बुद्धि, सिद्धि, विद्या, धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
सुबह 11:30 बजे के बाद लगी अमावस्या
पंडित अमर डब्बेवाला के अनुसार 8 नवंबर को सुबह 11:30 बजे के बाद अमावस्या तिथि शुरू हो गई, जो दिनभर रहेगी। अमावस्या के प्रदोष काल में माता लक्ष्मी के पूजन की मान्यता और परंपरा है।
रविवार और गज वाहन का संयोग समृद्धि का संकेत
श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र के ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास के अनुसार इस बार दीपावली पर बुधादित्य योग रहेगा। मान्यता के अनुसार माता महालक्ष्मी गज वाहन पर सवार होकर आएंगी।
रविवार को दीपावली और माता का गज वाहन पर आगमन व्यापार, व्यवसाय और किसानों के लिए शुभ संकेत माना जाता है। पं. व्यास ने बताया कि रविवार और गज वाहन का यह संयोग समृद्धि, तेज और जनकल्याण का कारक बनेगा।
उज्जैन में लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए शाम 6:11 से रात 8:09 बजे तक वृषभ स्थिर लग्न का शुभ मुहूर्त रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:45 से रात 8:19 बजे तक और महानिशीथ काल रात 1:25 से 3:25 बजे तक रहेगा। महानिशीथ काल शाक्त परंपरा में महालक्ष्मी एवं शक्ति उपासना, मंत्र-जप और ध्यान के लिए विशेष माना जाता है।



