चोट के बावजूद नहीं मानी हार, हल्द्वानी के चेतन भट्ट एशियन गेम्स में कांस्य से चूके

हल्द्वानी.

एशियन गेम्स-2026 में भारत को कराटे में पदक दिलाने की उम्मीद लेकर उतरे हल्द्वानी के चेतन भट्ट का अभियान बेहद करीबी मुकाबले में खत्म हो गया।

मंगलवार सुबह पुरुष कराटे कुमिते (Male Karate Kumite) में कांस्य पदक के मुकाबले में चेतन भट्ट को चीनी ताइपे के चुंग मेंग-यू के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले सेमीफाइनल में चोट ने उनकी चुनौती को प्रभावित किया था। हालांकि, टखने में दर्द के बावजूद चेतन ने कांस्य पदक के लिए मुकाबले में उतरकर जुझारूपन दिखाया।

चोट के कारण सेमीफाइनल में हुए परेशानी
चेतन भट्ट का सेमीफाइनल मुकाबला जॉर्डन के मोहम्मद अलजा'फारी के खिलाफ हुआ। मुकाबले के दौरान टखने में चोट लगने के बाद चेतन का प्रदर्शन प्रभावित हुआ। इसका फायदा जॉर्डन के खिलाड़ी ने उठाया और मुकाबला 8-0 से अपने नाम कर लिया। अलजा'फारी ने शुरुआत में एक अंक हासिल किया। इसके बाद उन्होंने दो अंक का वाजा-आरी लगाया और सिर पर किक से तीन अंक हासिल किए। लगातार दो युको के बाद उनका स्कोर 8-0 हो गया और मुकाबला जल्दी खत्म हो गया। चोट के कारण चेतन अपनी पूरी क्षमता के साथ मुकाबला नहीं कर सके और सेमीफाइनल में हार के बाद उन्हें कांस्य पदक के मुकाबले में उतरना पड़ा।

कांस्य मुकाबले में एक अंक से चूके
चेतन ने चोट के बावजूद कांस्य पदक के मुकाबले में चीनी ताइपे के चुंग मेंग-यू के खिलाफ मैट पर वापसी की। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा और रक्षात्मक रहा। निर्धारित मुकाबले के बाद स्कोर 1-1 से बराबर था। दोनों खिलाड़ियों ने एक-एक युको के जरिए अंक हासिल किया। हालांकि, मुकाबले का पहला अंक चुंग मेंग-यू ने बनाया था। इसी वजह से सेंशु यानी पहले अंक की बढ़त के नियम के आधार पर जीत चीनी ताइपे के खिलाड़ी को मिली और चेतन कांस्य पदक से चूक गए।

पनियाली के रहने वाले हैं चेतन
चेतन भट्ट हल्द्वानी के पनियाली क्षेत्र के रहने वाले हैं। एशियन गेम्स में उनके प्रदर्शन को लेकर क्षेत्र में भी उम्मीदें थीं। चोट के बावजूद पदक के लिए आखिरी मुकाबले में उतरने के उनके फैसले ने उनके संघर्ष और हौसले को दिखाया। चेतन के कोच वीरेंद्र राठौर ने पदक से चूकने पर मायूसी जताई। उन्होंने कहा कि चोट के चलते चेतन पदक जीतने से चूक गए। हालांकि, कोच को उम्मीद है कि चेतन आने वाली प्रतियोगिताओं में मजबूत वापसी करेंगे और देश के लिए पदक जीतकर लौटेंगे।

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